भूमिका

आज हम सभी जानते है कि हमें ज्ञान पाने के लिये कुछ न कुछ पढ़ना चाहिए, लेकिन क्या पढ़े यह बहुत कम लोग जानते है। ज्ञानी और विद्वान लोगो का मानना है कि पढ़े-लिखे और समझदार इंसान को इशारा ही काफी होता है। जी हां, आज के युग में किसी भी क्षेत्र की बात की जाये तो हम पायेंगे की न सिर्फ हमारी युवा पीढ़ी, बल्कि समाज का हर वर्ग तरक्की के मामले में आसमान तो क्या मंगलग्रह की बुलदिंयो को छू रहा है। फिर भी न जानें इतनी तरक्की के बावजूद आज समाज में स्वार्थ और अंधकार का माहौल क्यूं बढ़ता जा रहा है? बहुत कम लोग जानते है कि शिक्षा का पहला मकसद दिमाग और शरीर की सफाई करना होता है। कल तक हर शख्स सीधी-सादी जिंदगी से बहुत खुश था। सब लोग हर समय प्यार से हंसते-खेलते और हर समय खुश नजर आते थे। गम, परेशानी और अंधकार की छाया दूर-दूर तक कहीं दिखाई नहीं देती थी। यह भी ठीक है, कि अच्छी शिक्षा के कारण हर इन्सान अपनी जिम्मेदारियों को ठीक तरह से समझते हुए निभा रहा है। भगवान ने हमें इतनी बुद्वि दी है कि हम जीवन में कुछ भी बनना चाहे, कुछ भी पाना चाहे तो ठीक राह पर चले हुए अपनी मंजिल को पा सकते है।

हमारे बड़े बर्जुगो का यह मानना है कि मिल-जुल कर परस्पर विचार-विमर्श से ही हर बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है। जात पात में कुछ नही रखा, व्यक्ति के काम और गुणों से ही उसे परखा जाता है। हमारी वाण्ाी से ही लोग हमारे दोस्त या दुश्मन बनते है। अपने जीवन के तर्जुबे के आधार पर जब वो ऐसी बाते समझाने का प्रयास करते तो नई पीढ़ी को यह सब कुछ एक बोझ सा प्रतीत होता है। युवाओं को यह कभी नही भूलना चहिये कि अधूरे ज्ञान के कारण कई बार जल्दबाजी में फैसले कर दिये जाते हैं, जबकि अनुभव से जीवन के हर पहलू में सूझ-बूझ पैदा होती है। जीवन में हर वस्तु के दो पहलु होते है, आप जब उज्जवल पक्ष को ही देखते हुए प्रयास करते है, तो जल्द ही मंजिल आपके करीब होती है॥

लेकिन इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता, कि आधुनिकता के नाम पर हम अपने सदियों पुराने संस्कारों को भूल कर दिखावे को अधिक पंसद करने लगे है। अपनी कलम के माध्यम से मैने परिवार और समाज के हर वर्ग में प्रेम और आपसी नजदीकियों को और अधिक मजबूत करने का एक खास प्रयास किया है। रिश्तो को बेहतर तरीके से निभाने के लिये कैसे छोटी-छोटी बातों में सावधानी रखी जाये कि हर परिवार और समाज में केवल खुशीयां ही खुशीयां महके। हमें जीवन में कुछ भी पाना है तो सदैव यह याद रखना चहिये कि विनम्रता प्राप्ति की पहली सीढ़ी है। मेरा यह मानना है कि अच्छे ज्ञान से ही हमें यह पता चलता है कि धर्म और अधर्म में क्या फर्क होता है? इसीलिये समय की मांग के मुताबिक मैंने अपने लेखों द्वारा समाज के हर वर्ग को इशारों-इशारों में अपने मन की बात पहुंचाने की कोशिश की है।

 

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